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Friday, February 28, 2025

करतार सिंह दुग्गल (जनम)

करतार सिंह दुग्गल🎂जन्म 01 मार्च, 1917⚰️मृत्यु 26 जनवरी, 2012

करतार सिंह दुग्गल 
🎂01 मार्च 1917, रावलपिंडी ज़िला, पाकिस्तान
⚰️ 26 जनवरी 2012, पंजाब
इनाम: पद्म भूषण
पति: आयेशा जाफ़री (विवा. ?–2012)
पेशा
साहित्यकार
भाषा
पंजाबी भाषा
राष्ट्रीयता
भारतीय
उल्लेखनीय काम
इक छिट् चानण दी
 एक पंजाबी लेखक जिस ने पंजाबी उर्दू, हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में लिखा। उन्होंने लघु कथाएँ, उपन्यास, नाटक और नाटकों की रचना की और उनकी रचनाएँ का भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद भी हुआ है। उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के निदेशक के रूप में सेवा की है। उन को सन १९८८ में भारत सरकार द्वारा साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये दिल्ली राज्य से हैं। इनके द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह इक छिट् चानण दी के लिये उन्हें सन् 1965 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

अन्य जानकारी करतार सिंह दुग्गल ने सैकड़ों कहानियाँ और कविताएँ लिखीं तथा उनकी कहानियों के कुल 24 संग्रह प्रकाशित हुए। इसी तरह कविताओं के भी 2 संग्रह प्रकाशित हुए।

परिचय
करतार सिंह दुग्गल का जन्म 1 मार्च, 1917 को रावलपिंडी (अब पाकिस्तान), अविभाजित पंजाब में हुआ था। उन्होंने लाहौर के फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज से अंग्रेज़ी में एम.ए. किया था। उन्होंने 1942 से 1966 तक आकाशवाणी में केंद्र निदेशक समेत विभिन्न पदों पर काम किया तथा इस दौरान उन्होंने आकाशवाणी के लिये पंजाबी समेत दूसरी भाषाओं में कई नाटक और कहानियाँ लिखीं। इनकी पत्नी का नाम 'आयशा' है तथा इनका एक पुत्र भी है। 1966-73 में करतार सिंह दुग्गल नेशनल बुक ट्रस्ट के निदेशक पद पर थे और 1973 से 1976 तक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में बतौर सलाहकार उन्होंने अपनी सेवाएं दीं।

रचनाएँ
करतार सिंह दुग्गल ने सैकड़ों कहानियाँ और कविताएँ लिखीं तथा उनकी कहानियों के कुल 24 संग्रह प्रकाशित हुये। इसी तरह कविताओं के भी 2 संग्रह प्रकाशित हुये। इसके अलावा उन्होंने 10 उपन्यास और 7 नाटक भी साहित्य संसार को सौंपे। इनकी कई कहानियों के भारतीय-विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुए और सैकड़ों संग्रह प्रकाशित हुए। करतार सिंह के दो कविता संग्रह और एक आत्मकथा भी पाठकों तक पहुँची। उनकी पुस्तकें कई विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनीं।

लोकप्रिय रचनाएँ
हाल मुरीदों का
ऊपर की मंजिल
इंसानियत
मिट्टी मुसलमान की
चील और चट्टान
तुषार कण
सरबत्त दा भला
माहिर फ़नकार
करतार सिंह के साहित्य को जानने वाले लोग इन्हें एक माहिर फ़नकार के तौर पर याद करते हैं। दिल्ली पंजाबी साहित्य अकादमी के सचिव रवैल सिंह करतार सिंह दुग्गल को पंजाबी लेखकों में पहली पंक्ति का सिपाही मानते हैं। रवैल सिंह दुग्गल को गुरु ग्रंथ साहब के नए काव्य संस्करण के लिए भी याद करते हैं।

पुरस्कार
करतार सिंह दुग्गल को सन 1988 में भारत सरकार द्वारा 'साहित्य एवं शिक्षा' के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। करतार सिंह साहित्य अकादमी सम्मान सहित कई सम्मानों से नवाजे गए उन्होंने उपन्यास, कहानियाँ, और नाटक लिख कर अपने लिए साहित्य की दुनिया में जगह बनाई।

विश्व पुस्तक मेले के आरम्भकर्ता
करतार सिंह दुग्गल जब नेशनल बुक ट्रस्ट के संचालक बने तब उन्होंने 'विश्व पुस्तक मेले' का आग़ाज़ किया जो आज तक जारी है। भारत का सबसे बड़ा पुस्तकालय आन्दोलन, राजा राममोहन रॉय फाउंडेशन, भी दुग्गल साहब के हाथों क़ायम हुआ।

⚰️निधन
करतार सिंह दुग्गल का निधन 26 जनवरी, 2012 को दिल्ली में हुआ था।

दुग्गल ने चौबीस लघु कथा संग्रह, दस उपन्यास, सात नाटक, सात साहित्यिक आलोचना कृतियाँ , दो कविता संग्रह और एक आत्मकथा लिखी है। उनकी कई पुस्तकों को विभिन्न विश्वविद्यालयों ने स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए अपनाया है। उनकी रचनाओं में शामिल हैं:

📚लघु कथाएँ

एक गीत का जन्म (अंग्रेजी में)
मेरे स्वामी वापस आओ (अंग्रेजी में)
डांगर (पशु)
इक्क छित चानन्ह दी (प्रकाश की एक बूंद)
''स्वेरे सर''
''पीपल पटेआ''
नवां घर (नया घर)
सोनार बांग्ला (गोल्डन बंगला)
तारकलां वेले (शाम को)
जीनत आपा (एक मुस्लिम लड़की)
एक कमरा 10'x 8'

👉कविता

वीहवीन सदी ते होर कवितावन (बीसवीं सदी और अन्य कविताएँ)
कंधे कंधे (तट तट)

📚उपन्यास

शरद पूनम की रात (एक ठंडी पूर्णिमा की रात)
तेरे भान्हे (आपकी इच्छाएं)
नाखून और मांस (1969)
"मन परदेसी"(1982)
"अब ना बसून इह गाँव" (हिन्दी-1996)

👉अन्य कार्य

सत नाटक (सच्चा नानक) (एकांकी नाटक)
बंद दरवाज़े
मिट्टी मुसलमान की (एक मुस्लिम की धरती)
सिख धर्म का दर्शन और आस्था , हिमालयन इंस्टीट्यूट प्रेस, 1988. आईएसबीएन  978-0-89389-109-1 .
ज्ञानी गुरमुख सिंह मुसाफिर , नई दिल्ली: नेशनल बुक ट्रस्ट, 1999। आईएसबीएन 81-237-2765-8 । 

🏆पुरस्कार

करतार सिंह दुग्गल को उनके करियर के दौरान कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें शामिल हैं:

🏆पद्म भूषण 
साहित्य अकादमी पुरस्कार
ग़ालिब पुरस्कार
सोवियत भूमि पुरस्कार
भारतीय भाषा परिषद पुरस्कार
भाई मोहन सिंह वैद पुरस्कार
भारतीय भाषा परिषद पुरस्कार
पंजाबी लेखक सहस्राब्दि, पंजाब सरकार का पुरस्कार
भाई वीर सिंह पुरस्कार (1989) उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए भारत के उपराष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया गया
पंजाबी साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा प्रदान किया गया प्रमाण पत्र (1993)
अदीब इंटरनेशनल (साहिर सांस्कृतिक अकादमी) लुधियाना, भारत द्वारा साहिर पुरस्कार (1998)।
उन्होंने बहुत यात्राएँ की हैं। उन्होंने बुल्गारिया, उत्तर कोरिया, रूस, सिंगापुर, श्रीलंका, ट्यूनीशिया, ब्रिटेन और अमेरिका की यात्राएँ की हैं। सेवानिवृत्ति के बाद वे नई दिल्ली में रहते थे और अपना समय पढ़ने में बिताते थे।

कांग्रेस की लाइब्रेरी में उनकी 118 कृतियाँ हैं।

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