नाजिमा
जनम 25 मार्च 1948
मृत्यु 11 अगस्त 2025
हिन्दी सिनेमा के स्वर्ण युग की प्यारी 'बहन' और सहेली, अभिनेत्री नाजिमा के निधन पर एक श्रद्धांजलि।
🌑 हिन्दी सिनेमा के स्वर्ण युग की प्यारी बहन और सहेली, अभिनेत्री नाजिमा का निधन: एक श्रद्धांजलि 🌑
1960 के दशक के अंत और 1970 के दशक की शुरुआत के सिनेमा से परिचित दर्शक नाजिमा के उस मासूम चेहरे, बड़ी भावपूर्ण आँखों और मनमोहक मुस्कान को आसानी से याद कर लेंगे, जो इस प्रतिभाशाली अभिनेत्री की पहचान थी। उन्होंने नायक या नायिका की 'बहन' के रूप में अपार लोकप्रियता हासिल की थी और पर्दे पर उनकी उपस्थिति हमेशा सुखद रहती थी।
नाजिमा (25 मार्च 1948 - 11 अगस्त 2025) एक बॉलीवुड अभिनेत्री थीं, जो 1960 और 70 के दशक की शुरुआत में सहायक भूमिकाओं के लिए प्रसिद्ध थीं। उन्हें बॉलीवुड की "रेसिडेंट सिस्टर" (स्थायी बहन) के रूप में जाना जाता था। बाल कलाकार के रूप में उन्हें 'बेबी चाँद' के नाम से भी जाना जाता था। वह 1954 से 1975 तक फिल्मों में सक्रिय रहीं। (संकलन: सुरेश सरवैया)
प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि
नाजिमा का जन्म 25 मार्च 1948 को नासिक (तब बॉम्बे प्रेसीडेंसी) में हुआ था। उनका असली नाम मेहरुन्निसा था। वह अभिनेत्री शरीफा बाई (1930 के दशक) और हुस्न बानो (1940 के दशक) की रिश्तेदार थीं, जो क्रमशः उनकी दादी और चाची थीं। फिल्मी पृष्ठभूमि से होने के कारण, उन्हें जल्द ही उनकी शुरुआती फिल्मों में 'बेबी चाँद' के नाम से बाल कलाकार के रूप में लिया गया।
फिल्मी सफर
नाजिमा ने अपने करियर की शुरुआत 1953 में "पतिता" और 1954 में "बिराज बहू" से एक बाल कलाकार के रूप में की थी। 1958 तक, उन्होंने स्टंट फिल्म "प्रिंसेस साबा" में मुख्य अभिनेत्री (हीरोइन) के रूप में अपनी शुरुआत की। वह 1961 में फिल्म "उमर कैद" के साथ मुख्यधारा के सिनेमा में आईं, जिसका निर्देशन उनके चाचा अस्पी ईरानी ने किया था।
इसके बाद प्रमोद चक्रवर्ती द्वारा निर्देशित हिट फिल्म "जिद्दी" (1964) आई। फिर रामानंद सागर की "आरज़ू" (1965) आई, जिसने सिल्वर जुबली मनाई। "आरज़ू" में अपने अभिनय के लिए उन्होंने बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन से सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार जीता। इसके बाद सुबोध मुखर्जी की "अप्रैल फूल" (1964) और जे. ओम प्रकाश की "आए दिन बहार के" (1968) जैसी सफल फ़िल्में आईं।
उन्होंने अनुभवी अभिनेता भारत भूषण के विपरीत "विद्यापति" (1964) में मुख्य नायिका की भूमिका निभाई। 1968 के एक साक्षात्कार में, नाजिमा ने इसे अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ भूमिका बताया था, लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही।
राजेश खन्ना और अन्य कलाकारों के साथ काम
नाजिमा ने 1967 में पारिवारिक फिल्म 'औरत' में राजेश खन्ना के साथ काम किया था। राजेश खन्ना की शुरुआती फिल्मों में से एक होने के नाते, वे दोनों बहुत युवा और एक आकर्षक जोड़ी लग रहे थे। हालाँकि, बाद की फिल्मों में उन्होंने सहायक भूमिकाएँ अपना लीं।
उनके यादगार प्रदर्शनों में 'मंचली', 'हनीमून', 'आए दिन बहार के' और 'बेईमान' शामिल हैं। 'बेईमान' में मनोज कुमार की बहन की भूमिका के लिए उन्हें फिल्मफेयर के सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री वर्ग में नामांकित किया गया था।
व्यक्तिगत जीवन और अंतिम समय
नाजिमा ने वर्ष 1975 में फिल्मों को अलविदा कह दिया और सार्वजनिक जीवन से दूरी बना ली। 2019 में, तबस्सुम ने अपने शो में बताया था कि नाजिमा ने नेवी कैप्टन अर्शुल रहमान से शादी की थी और वह अपना अधिकांश समय प्रार्थना और परिवार के साथ बिताती थीं। उनके दो बेटे हैं। उनके पति का निधन 2018 में हो गया था।
नाजिमा का निधन 11 अगस्त 2025 को 77 वर्ष की आयु में मुंबई में हुआ।
नाजिमा जी के बारे में यह जानकारी वाकई पुरानी यादों को ताजा कर देने वाली है। उन्होंने उस दौर में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी जब सहायक कलाकारों का भी अपना एक खास वजूद होता था।
विशेष रूप से 'आरज़ू' और 'आए दिन बहार के' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को आज भी सराहा जाता है। उनके बारे में एक दिलचस्प बात यह भी है कि उन्होंने 'अलबेली' (1974) और 'तमन्ना' (1969) जैसी फिल्मों में अपनी आवाज भी दी थी।
नाजिमा जी के फिल्मी सफर में कई ऐसे गीत हैं जो आज भी पुराने गानों के शौकीनों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। हालांकि उन्होंने अक्सर सहायक भूमिकाएँ निभाईं, लेकिन उन पर फिल्माए गए कुछ गाने फिल्म की जान बन गए थे।
यहाँ उनके कुछ सबसे लोकप्रिय गानों की सूची दी गई है:
| गीत | फिल्म | सह-कलाकार/संदर्भ |
|---|---|---|
| ऐ काश किसी दीवाने को... | आए दिन बहार के (1966) | यह उनके सबसे प्रसिद्ध गानों में से एक है, जिसे आशा भोसले ने गाया था। |
| हम बहनों के लिए... | अंजाना (1969) | यह एक सदाबहार 'राखी' गीत है, जिसमें वह राजेंद्र कुमार की बहन बनी थीं। |
| मेरी लाडली रे, बनी है तू... | राजा और रंक (1968) | इस भावुक गीत में वह एक प्यारी बहन के रूप में नजर आईं। |
| खता तो हो गई हमसे... | वोही लड़की (1967) | इस फिल्म में उन्होंने मुख्य अभिनेत्री (हीरोइन) की भूमिका निभाई थी। |
| छोटे से इस घर में... | मेरे भैया (1972) | भाई-बहन के प्रेम पर आधारित एक बहुत ही मार्मिक गीत। |
कुछ रोचक बातें:
* लता मंगेशकर और आशा भोसले ने उनके लिए अपनी आवाज दी, जिससे उनके गानों को और भी लोकप्रियता मिली।
* 'बेईमान' (1972) फिल्म के गानों में भी उनकी उपस्थिति को काफी सराहा गया, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर नामांकन मिला था।
* जैसा कि ऊपर चर्चा हुई, उन्होंने खुद भी 'अलबेली' और 'तमन्ना' जैसी फिल्मों में गाने गाए थे, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।
नाजिमा की प्रमुख फिल्में (Filmography):
* 1953-55: पतिता, बिराज बहू, देवदास (बाल कलाकार के रूप में)
* 1958: प्रिंसेस साबा (बतौर हीरोइन शुरुआत)
* 1964: जिद्दी, गजल, अप्रैल फूल
* 1965: आरज़ू
* 1966: आए दिन बहार के
* 1969: वारिस, डोली, अंजाना
* 1972: बेईमान
* 1973: हनीमून, मंचली
* 1975: संन्यासी
* 1986: लव एंड गॉड (1963 में शुरू हुई फिल्म जो देरी से रिलीज हुई)