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Thursday, March 28, 2024

उत्पल दत्त

उत्पल दत्त
अन्य नाम उत्पल दा

🎂जन्म 29 मार्च, 1929
जन्म भूमि बारीसाल, पूर्वी बंगाल
⚰️मृत्यु 19 अगस्त, 1993

अभिभावक गिरिजारंजन दत्त
पति/पत्नी शोभा सेन
संतान बिष्णुप्रिया (पुत्री)
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र हिन्दी तथा बांग्ला सिनेमा
मुख्य फ़िल्में 'गोलमाल', 'सात हिन्दुस्तानी', 'रंग बिरंगी', 'अंगूर', 'कर्तव्य', 'ईमान धर्म', 'शुभ लग्न' आदि।
शिक्षा अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातक
विद्यालय 'सेंट जेवियर कॉलेज', कोलकाता
पुरस्कार-उपाधि 'फ़िल्म फ़ेयर बेस्ट कॉमेडियन अवार्ड', 'नेशनल फ़िल्म अवार्ड'।
प्रसिद्धि अभिनेता तथा फ़िल्म निर्देशक
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी 1940 में उत्पल दत्त अंग्रेज़ी थिएटर से जुड़े और अभिनय की शुरूआत कर दी। इस दौरान उन्होंने थिएटर कंपनी के साथ भारत और पाकिस्तान में कई नाटक मंचित किए। नाटक 'ओथेलो' से उन्हें काफ़ी वाहवाही मिली थी।
उत्पल भारतीय सिनेमा के ऐसे प्रसिद्ध अभिनेता थे, जिन्होंने हिन्दी और बांग्ला फ़िल्मों में अपनी अमिट छाप छोड़ी। एक अभिनेता के रूप में उत्पल दत्त ने लगभग हर किरदार को निभाया। हिन्दी पर्दे पर कभी पिता तो कभी चाचा, कहीं डॉक्टर तो कहीं सेठ, कभी बुरे तो बहुधा अच्छे बने 'उत्पल दा' को दर्शक किसी भी रूप में नहीं भूल सकेंगे। उत्पल दत्त को अधिकतर एक हास्य अभिनेता के रूप में याद किया जाता है। वर्ष 1979 की सुपरहिट फ़िल्म 'गोलमाल' में उनके द्वारा निभाया गया 'भवानी शंकर' का शानदार हास्य अभिनय आज भी याद किया जाता है। उत्पल दत्त एक उच्च दर्जे के अभिनेता ही नहीं, एक कुशल निर्देशक और नाटककार भी थे। सीरियल से लेकर कॉमेडी तक के हर रोल को उन्होंने बड़ी संजीदगी से निभाया था।

जन्म तथा शिक्षा

उत्पल दत्त का जन्म 29 मार्च, 1929 को पूर्वी बंगाल (ब्रिटिश भारत) के बारीसाल में एक हिन्दू परिवार में हुआ था। इनके ‌पिता का नाम गिरिजारंजन दत्त था, जिन्होंने अपने पुत्र को पढ़ाई के लिए कोलकाता (भूतपूर्व कलकत्ता) भेजा। उत्पल जी ने वर्ष 1945 में मेट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और फिर 1949 में 'सेंट जेवियर कॉलेज', कोलकाता से अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।

विवाह

वर्ष 1960 में उत्पल दत्त ने थिएटर और फ़िल्म एक्ट्रेस शोभा सेन से विवाह किया। डॉक्टर बिष्णुप्रिया उनकी एक मात्र संतान हैं।

फ़िल्मी शुरुआत

1940 में उत्पल दत्त अंग्रेज़ी थिएटर से जुड़े और अभिनय की शुरूआत कर डाली। शेक्सपियर साहित्य से उत्पल जी का बेहद लगाव था। इस दौरान उन्होंने थिएटर कंपनी के साथ भारत और पाकिस्तान में कई नाटक मंचित किए। नाटक 'ओथेलो' से उन्हें काफ़ी वाहवाही मिली थी। बाद में उत्पल दत्त का रुझान अंग्रेज़ी से बंगाली नाटक की ओर गया। 1950 के बाद उन्होंने एक प्रोडक्‍शन कंपनी जॉइन कर ली और इस तरह उनका बंगाली फ़िल्मों से कैरियर शुरू हो गया। बंगाली फ़िल्मों के साथ उनका थिएटर से प्रेम भी जारी रहा। इस दौरान उन्होंने कई नाटकों को निर्देशन ही नहीं बल्कि लेखन कार्य भी किया। बंगाली राजनीति पर लिखे उनके नाटकों ने कई बार विवाद को भी जन्म दिया।

हास्य कलाकार

1950 में मशहूर फ़िल्मकार मधु बोस ने उन्हें अपनी फ़िल्म 'माइकल मधुसुधन' में लीड रोल दिया, जिसे काफ़ी सराहा गया। इसके बाद उत्पल दत्त ने सत्यजीत रे की फ़िल्मों में भी काम किया। हिन्दी सिनेमा में उत्पल दत्त एक महान् हास्य अभिनेता के रूप में जाने जाते थे। हालांकि उन्होंने बहुत कम फ़िल्मों में काम किया। 'गुड्डी', 'गोलमाल', 'नरम-गरम', 'रंग बिरंगी' और 'शौ‌कीन'।

उत्पल दत्त हिन्दी सिनेमा में अत्यंत व्यस्त काफ़ी देर में हुए थे, वैसे बंगाली रंगमंच तथा सिनेमा में उनका बहुत नाम था। उन्होंने हिन्दी फ़िल्मों की अपनी लंबी सूची में बहुधा हास्य प्रधान भूमिकाएँ की थीं। मगर अमिताभ बच्चन की प्रथम फ़िल्म 'सात हिन्दुस्तानी' में वे भी एक हिन्दुस्तानी थे। बल्कि एक तरह से देखा जाय तो उत्पल जी ही मुख्य भूमिका में थे और अमिताभ बच्चन समेत अन्य सभी कलाकार सहायक भूमिकाएँ निभा रहे थे। उसी तरह से सत्तर के दशक में भारतीय समांतर सिनेमा की नींव जिन फ़िल्मों से रखी गई थी, उन प्रमुख कृतियों में 'भुवन शोम' भी थी और उसके नायक भी उत्पल दत्त थे। इस फ़िल्म के अभिनय के लिए उत्पल जी को वर्ष 1970 में श्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था। मगर हिन्दी सिनेमा में उनको भरपूर प्रतिष्ठा और काम ऋषिकेश मुखर्जी की 'गोलमाल' से मिली, जो न आर्ट फ़िल्म बनाते थे और न ही कमर्शियल फ़ार्मुला फ़िल्म।

फ़िल्म 'गोलमाल'

फ़िल्म 'गोलमाल' में ऋषिदा (ऋषिकेश मुखर्जी) ने उत्पल दत्त की गंभीर छवि के विपरित 'भवानीशंकर' के एक ऐसे पात्र की भूमिका दी, जिन्हें मूछों से अधिक लगाव था। हीरो अमोल पालेकर से लेकर दीना पाठक तक के सभी अदाकारों का हास्य अभिनय आज भी एक मिसाल है। किंतु उत्पल दा गंभीर रहकर भी इतना हंसा गए थे कि उस वर्ष 'बेस्ट कमेडियन' का फ़िल्मफ़ेयर एवार्ड उन्हें मिला था। फ़िल्म 'गोलमाल' में उत्पल जी जिस अंदाज़ से 'अच्छाआ....' बोलते थे, वो उनका ट्रेड मार्क बन गया था। आज भी मिमिक्री आर्टिस्ट उस तकिया कलाम को बोलते हैं, तो दर्शक समझ जाते हैं कि वह उत्पल दत्त की नकल कर रहे हैं। हिन्दी फ़िल्मों में फिर तो उनको हलकी-फुलकी भूमिकाएँ मिलतीं गईं। तब ये कौन सोच सकता था कि बंगाली और हिन्दी मनोरंजन जगत् के इस दिग्गज अभिनेता ने अपना करियर अंग्रेज़ी रंगमंच से प्रारम्भ किया था।

🎥

यह उत्पल दत्त की अधूरी फिल्मोग्राफी है।

माइकल मधुसूदन (1950)
विद्यासागर (1950)
विक्रम उर्वशी (1954)
रानी रासमणि (1955)
टका आना पे (1956)
सुभलग्न (1956)
हरानो सूर (1957)
सप्तपदी (1961) (स्वर)
रक्त पलाश (1962)
शेष अंका (1963)
सूर्य शिखा (1963)
मोमर अलो (1964)
शेक्सपियर-वल्लाह (1965)
चौरंगी (1968)
गुरु (1969)
भुवन शोम (1969)
सात हिंदुस्तानी (1969)
बॉम्बे टॉकी (1970)
कलंकिता नायक (1970)
कलकत्ता 71 (1971)
गुड्डी (1971)
खुनजे बेरई (1971)
एक अधूरी कहानी (1972)
मेरे जीवन साथी (1972)
सबसे बड़ा सुख (1972)
हनीमून (1973)
मरजीना अब्दुल्ला (1973)
श्रीमान पृथ्वीराज (1973)
असाती (1974)
कोरस (1974)
मिस्टर रोमियो (1974)
जुक्ती, तक्को आर गप्पो (1974)
थगिनी (1974)
अमानुष (1975)
जूली (1975)
अनाड़ी (1975)
पलंका (1975)
जन अरण्य (1976)
दत्ता (1976)
दो अंजाने (1976)
सनटैन (1976)
सेई चोख (1976)
शेक (1976)
कोतवाल साब (1977)
यही है जिंदगी (1977)
इम्मान धरम (1977) बलबीर सिंह, मिलिट्री मैन के रूप में
आनंद आश्रम (1977)
अनुरोध (1977)
दुल्हन वही जो पिया मन भाये (1977)
फरिश्ता या कातिल (1977)
किस्सा कुर्सी का (1977)
प्रियतमा (1977)
स्वामी (1977)
अतिथि (1978)
स्ट्राइकर (1978)
सफेद हाथी (1978)
धनराज तमांग (1978)
जोई बाबा फेलुनाथ (1978)
टूटे खिलोने (1978)
कर्तव्य (1979) दीवान धनपति राय के रूप में
गोल माल (1979)
महान जुआरी (1979)
झोर (1979)
प्रेम विवाह (1979)
समझौता (1980)
हीरक राजार देशे (1980)
पका देखा (1980)
अपने पराए (1980)
राम बलराम (1980)
अग्नि परीक्षा (1981)
नरम गरम (1981)
बरसात की एक रात (1981) उर्फ़ अनुसंधान (भारत: बंगाली शीर्षक)
चलचित्रा (1981)
मेघमुक्ति (1981)
सुबर्ना गोलक (1981)
शौकीन (1981)
बैसाखी मेघ (1981) कर्नल मैनिंघम के रूप में
राजबधू (1982)
रास्ते प्यार के (1982)
हमारी बहू अलका (1982)
अंगूर (1982)
अच्छा बुरा (1983)
रंग बिरंगी (1983)
दुती पाटा (1983)
किसी से ना कहना (1983)
पसंद अपनी अपनी (1983)
शुभ कामना (1983)
प्रेम विवाह (1984)
जॉन जानी जनार्दन (1984)
लाखों की बात (1984)
इंकलाब (1984)
पार (1984)
ये देश (1984)
साहेब (1985)
हरिश्चंद्र शैब्या (1985)
मेरा दामाद (1985)
आर पार (1985)
अन्यय अभिचार (1985) 
उल्टा सीधा (1985)
आप के साथ (1986)
बात बन जाये (1986)
किरायदार (1986)
मैं बलवान (1986)
पथभोला (1986)
सदा सुहागन (1986)
किस्सा काठमांडू का (1986-1987, टीवी श्रृंखला)
प्यार के काबिल (1987)
आज का रॉबिन हुड (1987)
आशा ओ भालोबाशा (1988)
महावीर (1988)
ला नुइत बंगाली (1988)
बहुरानी (1989)
जवानी जिंदाबाद (1990)
मेरा पति सिर्फ मेरा है (1990)
अगंतुक (1991)
जान पेचाँ (1991)
पथ-ओ-प्रसाद (1991)
पद्मा नादिर माझी (1992)
ब्योमकेश बख्शी (1993)
मिस्टी मधुर (1993)
अजना पथ (1994)
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