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Saturday, March 9, 2024

पद्मा खन्ना

#10march 
पद्मा खन्ना

🎂10 मार्च 1949  वाराणसी

पति: जगदीश सिदाना (विवा. 1986)
बच्चे: नेहा सिदाना, अक्शर सिदाना
पेशाअभिनेत्री
जीवनसाथी-जगदीश सिडाना ​
पद्मा खन्ना मात्र 21 साल की उम्र में एक्टिंग शुरू करने वाली पद्मा खन्ना ने लम्बा अरसा सिनेमा में बिताया। हर भाषा में काम किया लेकिन एक दौर आया जब वह काम-धाम छोड़ अमेरिका में शिफ्ट हो गईं।
 खूबसूरत नैन-नक्श, कातिलाना अदाएं और डांस में महारथ... जवानी के दिनों में कुछ ऐसी थीं वाराणसी की रहने वालीं पद्मा खन्ना। देव आनंद और अमिताभ बच्चन जैसे अभिनेताओं के साथ काम कर चुकीं पद्मा कभी सिनेमा की बेहतरीन अदाकारा और डांसिंग क्वीन हुआ करती थीं।7 साल की उम्र से शुरू किया डांस
10 मार्च 1949 को जन्मी पद्मा खन्ना को बचपन से ही डांस में दिलचस्पी थी। सात साल की उम्र में उन्होंने पंडित बिर्जु महाराज से डांस सीखा। फिर वह अपने होमटाउन में ही छोट-मोटे शोज करने लगी। एक दिन उन पर सिनेमा की बेहतरीन अदाकारा विजयंतीमाला की नजर पड़ी। विजयंतीमाला खुद भी डांस में अव्वल थीं। उन्हें पद्मा का डांस इतना पसंद आया कि उन्होंने अभिनेत्री को सिनेमा में अपना लक आजमाने की सलाह दी।पद्मा खन्ना, विजयंतीमाला के कहने पर सिनेमा में अपना करियर बनाने आ तो गईं, लेकिन कोई गॉडफादर और फिल्मी बैकग्राउंड न होने के चलते हाथ कुछ नहीं आया। फिर उन्होंने भोजपुरी इंडस्ट्री में कदम रखा। बलम परदेसिया समेत कई भोजपुरी फिल्मों में सेकंड लीड कर पद्मा ने नाम कमाया।जॉनी मेरा नाम में आइटम नंबर था बड़ी गलती?
पद्मा खन्ना को हिंदी सिनेमा में बड़ा ब्रेक देव आनंद की फिल्म जॉनी मेरा नाम से मिला। इस फिल्म में पद्मा को पॉपुलैरिटी तो दिलाई, लेकिन यह उनके लिए पछतावे का सबब भी बनी। इसकी वजह थी फिल्म में आशा भोसले द्वारा गाया जाने वाला गाना 'हुस्न के लाखों रंग'। इस गाने के बोल उस वक्त काफी वल्गर माने गए, गाने में फीचर हुईं पद्मा भी बोल्ड लुक में दिखाई दीं।
ऐसे में पद्मा खन्ना को इस तरह का आइटम नंबर करना भारी पड़ा। इसके बाद उनके पास इस तरह के प्रोजेक्ट्स की बाढ़ आ गई। हालांकि, उन्होंने किसी को भी एक्सेप्ट नहीं किया। एक इंटरव्यू में पद्मा ने कहा था कि जॉनी मेरा नाम में आइटम नंबर करना उनकी सबसे बड़ी गलती थी। बाद में पद्मा ने अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) के साथ फिल्म सौदागर में काम किया और वहां भी वह छा गईं।

वह पाकीजा में मीना कुमारी की डबल बॉडी भी बन चुकी हैं। दरअसल, शूटिंग के बीच ही मीना कुमारी की तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी। उस दौरान बचे हुए सींस पद्मा ने किए थे।

70 और 80 का दशक पद्मा खन्ना के नाम रहा। उन्होंने अपने अभिनय, डांस और किरदार से लाखों दिल जीते। उन्होंने कई फिल्मों में बतौर कैबरे डांसर मशहूर हो गईं। डांस से अपना जलवा बिखेरने वालीं पद्मा खन्ना के करियर में एक ऐसा दौर आया, जब उन्हें बैड गर्ल बनना पड़ा। जब पद्मा का फिल्मों में करियर ठीक-ठाक चल रहा था, तब उन्हें टीवी में काम करने का मौका मिला। यह रामानंद सागर का पौराणिक शो रामायण था।

रामायण में पद्मा खन्ना ने कैकयी की भूमिका निभाई थी। हालांकि, अभिनेत्री ने यह किरदार निभाने से साफ मना कर दिया था। उन्हें नेगेटिव किरदार निभाना मंजूर नहीं था। मगर रामानंद के कहने पर अभिनेत्री ने इसे स्वीकारा और वह घर-घर में कैकयी के रोल में मशहूर हो गईं।
पद्मा खन्ना ने साल 1986 में फिल्म डायरेक्टर जगदीश सिदाना के साथ शादी करके हमेशा के लिए एक्टिंग को अलविदा कह दिया और अमेरिका में शिफ्ट हो गईं। पति के निधन के बावजूद वह विदेश में ही रह रही हैं। इन दिनों वह न्यू जर्सी में डांस एकेडमी चला रही हैं। वहां वह अपने बच्चों नेहा और अक्षर के साथ डांस एकेडमी चलाकर जिंदगी बिता रही हैं।
🎥

📺टेलीविजन

हम टीवी पर पहचान (2006)।
सोनी टीवी पर तांक झांक
दूरदर्शन पर कैकेयी के रूप में रामायण
दूरदर्शन पर मेथा ज़हेर

📹हिंदी फिल्में

बीवी और मकान (1966)
ये जिंदगी कितनी हसीन है (1966)
साज़ और आवाज़ (1966)
बहारों के सपने (1967)
चांद पर चढ़ेगी (1967)
हीर रांझा (1970)
जॉनी मेरा नाम (1970)
परदे के पीछे (1971)
सीमा (1971)
चिंगारी (1971)
दास्तान (1972 फ़िल्म) (1972)
प्यार दीवाना (1972)
रामपुर का लक्ष्मण (1972)
पाकीज़ा (1972) (मीना कुमारी की बॉडी डबल)
सौदागर (1973)
दाग (1973 फ़िल्म)
जोशीला (1973)
अनहोनी (1973)
नैना (1973)
अनोखी अदा (1973)
आज की ताज़ा ख़बर (1973)
लोफर (1973)
कशमकश (1973)
आखिरी दाओ (1975)
हेरा फेरी (1976)
पापी (1977)
लाखन (1979)
जान-ए-बहार (1979)
नूरी (1979)
बनमानुष (1980)
धुआं (1981)
अनुभव (1986)
घर संसार (1986)
घर घर की कहानी (1988)
फ़र्ज़ की जंग (1989)
यार मेरी जिंदगी (2008)

🎞️भोजपुरी फिल्में

गंगा मईया तोहे पियारी चढ़इबो (1963)
बिदेसिया (1963)
बालम परदेसिया (1979)
धरती मैया (1981)
बसुरिया बाजे गंगा तीर (1986)
माई (1989)
दगाबाज बलमा
बहुरिया
गोदना
तुलसी सोरहे हमार अंगना
कजरी
रंगली चुनरिया रंग में तोहार
भौजी दे दा अचरवा के चाओ
भैया दूज (1984)
हे तुलसी मैया

🎬गुजराती फ़िल्में

वीर मंगदावलो (1976)
घेर-घेर माटी ना चूल्हा (1977)
उड़िया फ़िल्में
साक्षी गोपीनाथ (1978)

🎥पंजाबी फिल्में

जिंदरी यार दी (1978)
शेर पुत्तर (1978)

📽️मराठी फिल्म

देवता (1983 फ़िल्म) "खेल कुनाला दैवाचा कलाला" गीत में कैमियो
माफ़ीचा साक्षीदार (1986) - "शमा ने जब आग" गाने में कैमियो🎞️

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