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Tuesday, May 28, 2024

योगेश गीतकार

योगेश गौड़
प्रसिद्ध नाम गीतकार योगेश
🎂जन्म 19 मार्च, 1943
जन्म भूमि लखनऊ, उत्तर प्रदेश
⚰️मृत्यु 29 मई, 2020
मृत्यु स्थान बसई, मुम्बई, महाराष्ट्र
कर्म भूमि मुम्बई
कर्म-क्षेत्र फ़िल्मी गीत एवं पटकथा
मुख्य रचनाएँ 'कहीं दूर जब दिन ढल जाये', 'ज़िन्दगी कैसी है पहेली' (फ़िल्म- आनंद), 'रिमझिम गिरे सावन' (फ़िल्म- मंज़िल), 'रजनीगंधा फूल तुम्हारे' (फ़िल्म- रजनीगंधा)
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी योगेश ने अपने कैरियर में संगीतकार घरानों के ‘पिता-पुत्र’ संगीतकारों के साथ काम किया, इस परम्परा में सलिल एवं संजय चौधरी और सचिन देव एवं राहुल देव बर्मन के लिए गीत लिखे।
प्रसिद्ध भारतीय गीतकार और लेखक थे। उन्हें विशेष रूप से फ़िल्म 'आनंद' के गीत 'कहीं दूर जब दिन ढल जाये' और 'ज़िन्दगी कैसी है पहेली हाए'; 'रिमझिम गिरे सावन' (फ़िल्म- मंज़िल), 'रजनीगंधा फूल तुम्हारे' (फ़िल्म- रजनीगंधा) जैसे सुपरहित गीतों के लिए प्रसिद्धि प्राप्त है। 
उन्होंने भारतीय हिंदी सिनेमा में उनके दिये योगदान के लिए उन्हें 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' के अलावा 'यश भारती पुरस्कार' भी दिया गया।
हिन्दी फ़िल्मों के सुपरिचित गीतकार योगेश गौड उर्फ़ योगेश का जन्म लखनऊ, उत्तर प्रदेश में एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ। आरंभिक शिक्षा लखनऊ के संस्कृति संपन्न माहौल में हुई, इस तरह योगेश का बचपन और किशोरावस्था यहीं बीते। पिता की असामयिक मृत्यु के कारण पढाई बीच में ही रोक कर रोज़गार की तलाश में लग गए। परिवार, मित्रों की सलाह पर मायानगरी मुंबई का रुख किया, मकसद इतना था कि जल्द-से-जल्द कोई काम मिले। मुंबई फ़िल्म उद्योग में पहला लक्ष्य नहीं था, महानगर की परिस्थितियों में योगेश को समझ में नहीं आ रहा था कि किस तरह एक शुरुआत होगी। इस क्रम में उन्होंने कहानी लेखन को चुना और सफ़र पर निकल पड़े, धीरे-धीरे पटकथाएं और संवाद लिखकर सिने-जीवन का आगाज़ किया।

गीत एवं पटकथा लेखन
योगेश जी के मुंबई में आरंभिक संघर्ष को मित्र व सहयोगी सत्यप्रकाश ने साथ दिया, दोनों में सच्ची दोस्ती सा रिश्ता बना। भाई सत्यप्रकाश योगेश के सलाहकार, प्रेरक और संकट-मोचक रहे। मित्र के साथ ‘चाल’ में गुज़रा यह वक्त प्रेरणा का वरदान सा बन गया। आत्म-निर्भर पहचान के लिए अपने नाम से ‘गौड’ हटाने का फ़ैसला उनके व्यक्तित्व विकास के लिए अवसरों के नए द्वार लेकर आया, कहानी, पटकथा, संवाद के बाद कविता और गीत-लेखन की ओर उन्मुख हुए। यहां पर बचपन में कविता लिख कर याद करने का अभ्यास काम आया। लखनऊ का साहित्य-सांस्कृतिक सांचा और आत्मबल योगेश को कवि-गीतकार रूप दे गया।

योगेश जी को सगीत निर्देशक की ‘धुनों’ पर गीत लिखना पसंद नहीं था। गीत-लेखन की तकनीकी मांगों से अपरिचित होकर फ़िल्मकार रोबिन बैनर्जी के पास काम मांगा। उस समय सगीत धुनों पर ही गीत लिखने का चलन था। रोबिन बैनर्जी उन दिनों फ़िल्म ‘मासूम’ (1963) पर काम कर रहे थे। योगेश को रोबिन जी ने इस फ़िल्म के गीत लिखने को कहा। इस अनुभव ने उनकी आँखें खोल दी। अब वह संगीत धुनों पर लिखने को समझ चुके थे। रोबिन बैनर्जी-योगेश का सफ़र सखी रौबिन, मारवेल मैन, फ़्लाइंग सर्कस, रौबिनहुड समेत लगभग दर्जन भर फ़िल्मों तक रहा।

फ़िल्म 'आनंद' से मिली सफलता
प्रसिद्ध संगीत निर्देशक सलिल चौधरी बहु-चर्चित फ़िल्म ‘आनंद’ (1971) पर काम कर रहे थे, उन्हें इस फ़िल्म के लिए एक सुलझे हुए गीतकार की तलाश थी। मशहूर शैलेन्द्र की कमी में योगेश का चयन किया। आनंद की सफ़लता से ‘योगेश’ देशभर में विख्यात होकर सलिल चौधरी के साथ अपने कैरियर की ‘सफ़लतम’ यात्रा पर निकल पड़े। सलिल दा-योगेश ने आनंद के अलावे ‘अनोखादान’, ‘अन्नदाता’, ‘आनंद महल’, ‘रजनीगंधा’ और ‘मीनू’ जैसी फ़िल्मों में साथ काम किया। सलिल दा की जलेबीदार, कठिन संगीत धुनों के लिए गीत लिखना योगेश के लिए बहुत ही ‘चुनौतीपूर्ण’ कार्य रहा। निस दिन, रजनीगंधा फूल तुम्हारे, प्यास लिए मनवा जैसे गीतों में गीतकार की ‘कविताई’ निखर कर सामने आई। इस तरह सलिल दा के मापदंडों पर एक गीतकार ‘कवि’ भी बन सका।

योगेश ने अपने कैरियर में संगीतकार घरानों के ‘पिता-पुत्र’ संगीतकारों के साथ काम किया, इस परम्परा में सलिल एवं संजय चौधरी और सचिन देव एवं राहुल देव बर्मन के लिए गीत लिखे। जाने-माने संगीतकार सचिन देव बर्मन की ‘उसपार’ तथा ‘मिली’ योगेश के यादगार ‘प्रोजेक्ट’ रहे, इन फ़िल्मों का जीवंत गीत-संगीत इस साथ की सुनहरी याद है। 'मिली' अभी पूरी भी न हुई थी कि सचिन देव बीच में ‘बीमार’ पड़ गए, पिता की आधी फ़िल्म को राहुल देव बर्मन ने ‘बडी सूनी-सूनी है ज़िंदगी’ और ‘मैने कहा फूलों से’ रिकार्ड कर पूरा किया। संगीतकार राहुल की ‘लिस्ट’ में योगेश का नम्बर पाँचवीं पायदान पर आता था, फिर भी राहुल देव-योगेश की जोड़ी 8 से 10 फ़िल्मों में साथ आई।

फ़िल्मकार ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन मे बनी ‘आनंद’ (1971) के बाद योगेश को सिने जगत् में उचित सम्मान मिला, फ़िल्म के कभी ना भुलाए जा सकने वाले गीत आज भी लोकप्रिय बने हुए हैं। कहा जाता है कि ऋषिकेश जी को ‘आनंद’ बनाने की प्रेरणा मूलत: एक जापानी फ़िल्म से मिली, कहानी से इस क़दर प्रोत्साहित हुए कि केन्द्र में ‘महिला’ को रखकर ‘मिली’ भी बनाई। योगेश जी ने दोनों फ़िल्मों के गीत लिखकर ऋषिकेश दा की ‘सबसे बड़ा सुख’, ‘रंग-बिरंगी’ और ‘किसी से ना कहना’ के गीत समेत अनेक फ़िल्मों के गीत लिखे।

प्रसिद्ध गीत
कहीं दूर जब दिन ढल जाये (आनंद)
रिमझिम गिरे सावन (मंज़िल)
रजनीगंधा फूल तुम्हारे (रजनीगंधा)
ज़िन्दगी कैसी है पहेली (आनंद)
ना बोले तुम, ना मैने कुछ कहा (बातों बातों में)
कई बार यूँ भी देखा है (रजनीगंधा)
कहा तक ये मन को अंधेरे छलेंगे (बातों बातों में)
आए तुम याद मुझे, गाने लगी हर धडकन (मिली)
न जाने क्यों होता है, ये जिंदगी के साथ (छोटी सी बात)
चोर और चाँद (1993)
दुलारा (1994)
बेवफ़ा सनम (1995)
मृत्यु
गीतकार तथा लेखक योगेश का निधन 29 मई, 2020 को बसई, मुम्बई में हुआ।

हिंदी सिनेमा की महान कलाकार लता मंगेशकर ने उनके निधन पर लिखा- "मुझे अभी पता चला कि दिल को छूने वाले गीत लिखने वाले कवि योगेश जी का आज स्वर्गवास हो गया है। ये सुनकर मुझे बहुत दु:ख हुआ। योगेश जी के लिखे गीत मैंने गाए। योगेश जी बहुत शांत और मधुर स्वभाव के इंसान थे। मैं उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पण करती हूं"। योगेश के साथ लता मंगेशकर ने कई फिल्मों में काम किया था।

Sunday, May 12, 2024

उत्पला सैन

#12march 
#13may 
पुराने जमाने की हिंदी एवं बंगाली फिल्मों की पार्श्वगायिका उत्प्ला सेन 
 
🎂12 मार्च 1924 

⚰️13 मई 2005

जीवनसाथी
बेनु सेन ने उनकी मृत्यु के बाद सतीनाथ मुखर्जी से शादी की
परिवार
पुत्र- आशीष सेन; पोता- सूर्य सेन
एक प्रमुख भारतीय बंगाली पार्श्व गायिका थी  वह 1950 के दशक में संध्या मुखर्जी, प्रतिमा बनर्जी और अल्पना बनर्जी आदि के साथ अपने समय की बहुत लोकप्रिय पार्श्व गायिका थीं। उन्होंने हेमंत दा , मन्ना डे और अपने पति सतीनाथ मुखर्जी जैसे प्रमुख पुरुष गायकों के साथ कई युगल गीत गाये

उत्पला सेन का जन्म 12 मार्च 1924 को ढाका, ब्रिटिश भारत (अब बांग्लादेश में) में एक हिंदू परिवार में हुआ था।  उन्होंने हिरणबाला देवी और फिर उस्ताद गुल मोहम्मद खान से संगीत की शिक्षा ली उन्होंने पहली बार 1935 में ढाका रेडियो में 11 साल की उम्र में सार्वजनिक रूप से गाया था। उन्होंने 1939 में अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था। 1941 में, उन्हें भक्ति गीत "एक हट मोर पुजार थाला" से अपार लोकप्रियता मिली, जिसे सुधीरलाल चक्रवर्ती ने संगीतबद्ध किया था।  "महिषासुर मर्दिनिर शांति दिल भारी" गीत ने उनकी लोकप्रियता को बढ़ा दिया।  1940 के दशक की शुरुआत में, वह कलकत्ता, ब्रिटिश भारत (अब कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत) चली आयी और रेडियो आकाशवाणी से जुड़ गयी 1944 में, उन्होंने हिंदी फिल्म मेरी बहन से अपने हिंदी फिल्म कैरियर की शुरुवात की   फिर उसने 1954 तक कुछ हिंदी फिल्मों में गाने गाये  उन्होंने 11 हिंदी फिल्मों में कुल 17 गाने गाए।  उन्होंने आमतौर पर बिचारक (1959) में "अमार मल्लिका बोन" जैसी फिल्मों में टैगोर के गीत गाए।  1953 में सलिल चौधरी द्वारा लिखी गई फिल्म "प्रांततेरी गान अमर" के गीत ने उन्हें अपार लोकप्रियता दिलाई और आज तक का उनका यह सर्वश्रेष्ठ काम माना जाता है।  उन्होंने कुछ आधुनिक गीत भी गाए, उनमें से अधिकांश सत्यनाथ मुखर्जी के साथ थे।  उन्होंने 1957 में श्यामल मित्र के साथ "सप्तरंगेर खेला" में भी गाया।

उनकी शादी बेनू सेन से हुई थी और उनकी मृत्यु के बाद उनकी सास ने उन्हें सह गायक सतीनाथ मुखर्जी से शादी करने के लिए प्रेरित किया।  13 दिसंबर 1992 को सतीनाथ की मृत्यु हो गई। उत्पला पांच साल से कैंसर से पीड़ित थी और आखिरकार 13 मई 2005 को उनका निधन हो गया वह अपने पीछे इकलौते बेटे आशीष सेन, बहू प्रोमिता सेन और पोते सुरेश सेन को छोड़ गयीं

Saturday, May 11, 2024

सागर सरहदी

सागर तलवार (सरहदी)".
#11may
#22march 
गंगा सागर तलवार

🎂11 मई 1933
एबटाबाद , बाफ़ा, ब्रिटिश भारत
⚰️मृत22 मार्च 2021 (आयु 87 वर्ष)
मुंबई , भारत

राष्ट्रीयता
भारतीय
अन्य नामों
सागर
व्यवसाय
लघु कथाकार , नाटक लेखक , फ़िल्म निर्देशक , फ़िल्म लेखक , फ़िल्म निर्माता ,
अभिभावक
थान सिंह तलवार (पिता)
प्रेम दाई (माँ)
रिश्तेदार
रमेश तलवार (भतीजा)
4 भाई, 1 बहन
वह यश चोपड़ा की कभी-कभी (1976) से लोकप्रिय हुए , जिसमें अमिताभ बच्चन और राखी ने अभिनय किया था । उन्होंने नूरी (1979) सहित फिल्मों के लिए लेखन जारी रखा ; सिलसिला (1981) में शशि कपूर , अमिताभ बच्चन , जया भादुड़ी और रेखा ने अभिनय किया ; चाँदनी (1989) में ऋषि कपूर , श्रीदेवी और विनोद खन्ना ने अभिनय किया ; सुनील दत्त , रेखा , फारूक शेख और दीप्ति नवल अभिनीत फासले ; रंग (1993) जिसमें कमल सदाना और दिव्या भारती अभिनीत और तलत जानी द्वारा निर्देशित ; अनुभव में संजीव कुमार और तनुजा अभिनीत और बासु भट्टाचार्य द्वारा निर्देशित ; जिंदगी (1976); दूसरा आदमी ; कर्मयोगी ; कहो ना... प्यार है ; करोबार ; बाज़ार ; चौसर और पटकथा लेखक के रूप में एक प्रसिद्ध नाम बन गये।
🎥

गूंज (1974) --(संवाद)
अलिंगन (1974) --(संवाद)
कभी-कभी (1976 फ़िल्म) (पटकथा/संवाद) जिसमें अमिताभ बच्चन और राखी ने अभिनय किया
नूरी (1979 फ़िल्म) (पटकथा/संवाद) फारूक शेख और पूनम ढिल्लों अभिनीत
चांदनी (अनुवाद: "मूनलाइट") (1989 फ़िल्म) (संवाद) ऋषि कपूर , श्रीदेवी और विनोद खन्ना अभिनीत
सिलसिला (अनुवाद: "द अफेयर") (1981 फ़िल्म) (पटकथा) में शशि कपूर , अमिताभ बच्चन , जया भादुड़ी और रेखा ने अभिनय किया।
बाज़ार (1982 फ़िल्म) (निर्देशन) अभिनीत नसीरुद्दीन शाह , फ़ारूक़ शेख , स्मिता पाटिल , सुप्रिया पाठक और भरत कपूर
फासले (अनुवाद: "डिस्टेंस") (1995 फ़िल्म) (संवाद) सुनील दत्त , रेखा , फारूक शेख और दीप्ति नवल अभिनीत

Sunday, May 5, 2024

मुमताज अली

#06march 
राज एन. सिप्पी

राज सिप्पी
🎂06 मार्च 1948 
बम्बई , बम्बई राज्य , भारत
व्यवसाय
निर्देशक
निर्माता
पटकथा लेखक
उन्होंने अक्षय कुमार की पहली फिल्म सौगंध और संजय दत्त - जीतेंद्र स्टारर थानेदार का भी निर्देशन किया है ।
एक भारतीय फिल्म निर्देशक और निर्माता हैं जो बॉलीवुड फिल्मों पर काम करते हैं। 1980 के दशक में वह बहुत प्रसिद्ध थे, विनोद खन्ना के साथ इंकार , सत्यमेव जयते और महादेव , अमिताभ बच्चन के साथ सत्ते पे सत्ता , फिर मिथुन चक्रवर्ती के साथ बॉक्सर और बाजी जैसी सफल फिल्मों के साथ उन्होंने सत्यमेव जयते का निर्देशन किया। , ओशो के कार्यकाल के बाद विनोद खन्ना की वापसी वाली फिल्म ।
सिप्पी ने असफल जिमी , मिमोह चक्रवर्ती की पहली फिल्म का निर्देशन किया।
भारतीय सिनेमा उद्योग में अस्सी के दशक से सक्रिय फिल्म निर्माता-निर्देशक राज एन सिप्पी का आज जन्मदिन है। मुंबई में 6 मार्च 1948 को जन्मे राज एन सिप्पी को राज सिप्पी के नाम से भी जाना जाता है। सिप्पी ने विनोद खन्ना के साथ 'इंकार', 'सत्यमेव जयते', मिथुन चक्रवर्ती के साथ 'बॉक्सर' और 'बाजी' फिल्में बनाई थीं। उन्होंने अक्षय कुमार की पहली फिल्म 'सौगंध' और संजय दत्त-जीतेंद्र स्टारर 'थानेदार' का निर्देशन भी किया था।

📽️
2011 हैमिल्टन पैलेस
2008 जिमी
2004 ...वो
1998 कुदरत
1998 2001: दो हज़ार एक
1997 कोई किसी से कम नहीं
1997 डेशाट
1996 लालची
1995 पांडव
1995 निशाना
1994 इक्के पे इक्का
1994 अमानत
1993 परदेसी
1992 मिस्टर बॉन्ड
1991 सौगंध
1991 कुर्बानी रंग लाएगी
1990 थानेदार
1990 काली गंगा
1989 शहजादे
1989 महादेव
1987 सत्यमेव जयते
1987 लोहा
1986 जीवा
1985 सीतामगर
1985 शिवा का इन्साफ
1984 अंदर बाहर
1984 बाजी
1984 बॉक्सर
1983 कयामत
1982 सत्ते पे सत्ता
1981 जोश
1977 इंकार

राजन न सिप्पी

#06march 
राज एन. सिप्पी

राज सिप्पी
🎂06 मार्च 1948 
बम्बई , बम्बई राज्य , भारत
व्यवसाय
निर्देशक
निर्माता
पटकथा लेखक
उन्होंने अक्षय कुमार की पहली फिल्म सौगंध और संजय दत्त - जीतेंद्र स्टारर थानेदार का भी निर्देशन किया है ।
एक भारतीय फिल्म निर्देशक और निर्माता हैं जो बॉलीवुड फिल्मों पर काम करते हैं। 1980 के दशक में वह बहुत प्रसिद्ध थे, विनोद खन्ना के साथ इंकार , सत्यमेव जयते और महादेव , अमिताभ बच्चन के साथ सत्ते पे सत्ता , फिर मिथुन चक्रवर्ती के साथ बॉक्सर और बाजी जैसी सफल फिल्मों के साथ उन्होंने सत्यमेव जयते का निर्देशन किया। , ओशो के कार्यकाल के बाद विनोद खन्ना की वापसी वाली फिल्म ।
सिप्पी ने असफल जिमी , मिमोह चक्रवर्ती की पहली फिल्म का निर्देशन किया।
भारतीय सिनेमा उद्योग में अस्सी के दशक से सक्रिय फिल्म निर्माता-निर्देशक राज एन सिप्पी का आज जन्मदिन है। मुंबई में 6 मार्च 1948 को जन्मे राज एन सिप्पी को राज सिप्पी के नाम से भी जाना जाता है। सिप्पी ने विनोद खन्ना के साथ 'इंकार', 'सत्यमेव जयते', मिथुन चक्रवर्ती के साथ 'बॉक्सर' और 'बाजी' फिल्में बनाई थीं। उन्होंने अक्षय कुमार की पहली फिल्म 'सौगंध' और संजय दत्त-जीतेंद्र स्टारर 'थानेदार' का निर्देशन भी किया था।

📽️
2011 हैमिल्टन पैलेस
2008 जिमी
2004 ...वो
1998 कुदरत
1998 2001: दो हज़ार एक
1997 कोई किसी से कम नहीं
1997 डेशाट
1996 लालची
1995 पांडव
1995 निशाना
1994 इक्के पे इक्का
1994 अमानत
1993 परदेसी
1992 मिस्टर बॉन्ड
1991 सौगंध
1991 कुर्बानी रंग लाएगी
1990 थानेदार
1990 काली गंगा
1989 शहजादे
1989 महादेव
1987 सत्यमेव जयते
1987 लोहा
1986 जीवा
1985 सीतामगर
1985 शिवा का इन्साफ
1984 अंदर बाहर
1984 बाजी
1984 बॉक्सर
1983 कयामत
1982 सत्ते पे सत्ता
1981 जोश
1977 इंकार

Friday, May 3, 2024

धूमल

#13feb
#29march 


धुमाल 
🎂जन्म की तारीख और समय: 29 मार्च 1914
⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 13 फ़रवरी 1987, मुम्बई
बच्चे: हेमा धनंजय फटक
हिन्दी फ़िल्म के चरित्र एवं हास्य कलाकार थे।
अनंत बलवंत धूमल 
🎂29 मार्च 1914 
⚰️ 13 फरवरी 1987

 जिन्हें धूमल के नाम से जाना जाता है, बॉलीवुड फिल्मों के एक अभिनेता थे जो चरित्र भूमिकाएँ निभाने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कई फिल्मों में अभिनय किया और 1940 के दशक के मध्य से 1980 के दशक के अंत तक सक्रिय रहे। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत मराठी थिएटर से की , जिसने मराठी सिनेमा के लिए मार्ग प्रशस्त किया और बाद में वह हिंदी सिनेमा में चले गए , जहां उन्होंने ज्यादातर कॉमेडी भूमिकाएं निभाईं और बाद में अपने करियर में चरित्र भूमिकाएं निभाईं।  उन्होंने हावड़ा ब्रिज (1958),
 बॉम्बे का बाबू (1960), 
कश्मीर की कली (1964), गुमनाम (1965), 
दो बदन (1966),
 लव इन टोक्यो जैसी उल्लेखनीय फिल्मों में काम किया । (1966) और बेनाम (1974)।
अभिनय में उनका करियर तब शुरू हुआ जब वह एक ड्रामा कंपनी में शामिल हुए, जहाँ वे पेय परोसते थे और बर्तन धोते थे। ऐसे अवसर आते थे जब छोटी भूमिकाएँ निभाने वाले कलाकार उपस्थित नहीं हो पाते थे; इससे स्पॉट बॉयज़ को उनकी जगह भरने का मौका मिलेगा। इस तरह धूमल को नाटकों में छोटी-छोटी भूमिकाएँ मिलीं।

इसी दौरान उनकी मुलाकात नाटक जगत के बड़े नाम पीके अत्रे और नानासाहेब फाटक से हुई। जल्द ही, उन्हें पहचान मिलने लगी और बड़ी भूमिकाएँ मिलने लगीं। हालाँकि वह अंततः फिल्मों में एक हास्य अभिनेता के रूप में प्रसिद्ध हुए, लेकिन उन्हें एक खलनायक के रूप में अधिक जाना गया। उन्होंने लग्न ची बेदी और घर बाहर जैसे प्रसिद्ध नाटकों में प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं ।

मंच से उन्होंने अपना ध्यान सिल्वर स्क्रीन पर केंद्रित कर दिया। उन्होंने वो कौन थी , आंखें , गुमनाम , आरज़ू और ससुराल जैसी बड़ी फिल्मों में काम किया । उनकी पहली फिल्म पेडगांवचे शहाणे (1952) नामक एक मराठी फिल्म थी जिसमें उन्होंने एक दक्षिण भारतीय की भूमिका निभाई थी।

उन्होंने ससुराल (1961) जैसी कई हिंदी फिल्मों में साथी हास्य कलाकार महमूद और शोभा खोटे के साथ जोड़ी बनाई।
13 फरवरी 1987 को दिल का दौरा पड़ने से धूमल की मृत्यु हो गई।
📽️
1948 पीरा धायगुडे 
1948 जीवछ सखा 
1953 चाचा चौधरी 
1954 जागृति 
1956 परिवार 
1956 नई दिल्ली 
1956 एक शोला 
1957 अप्राधि कौन? 
1957 नाइट क्लब 
1958 सोने की चिड़िया 
1958 पुलिस 
1958 फागुन 
1958 खोटा पैसा
1956 सुवर्णा सुंदरी 
1956 पसंत आहे मुलगी 
1957 एक गांव की कहानी
1958 हावड़ा ब्रिज
1958 जासूसी
1958 उजाला 
1959 मैं नशे में हूं
1959 छोटी बहन 
1960 जगच्या पथिवर 
1960 गर्ल फ्रेंड (1960 फ़िल्म) 
1960 एक फूल चार कांटे
1960 बम्बई का बाबू
1960 शोला और शबनम 
1961 ससुराल
1961 मेम-दीदी 
1961 दोस्त 
1962 साहिब बीबी और गुलाम
1962 रुंगोली
1962 एक मुसाफिर एक हसीना 
1962 इजली चमके जमना पार 
1962 अनपढ़
1962 आज और कल
1963 प्यार का बंधन
1963 बम्बई में छुट्टियाँ 
1963 हमराही
1963 अकेला 
1963 जिंदगी 
1964 जिद्दी
1964 जिद्दी 
1964 वो कौन थी?
1964 कश्मीर की कली 
1964 आवारा बादल 
1964 Gumnaam
1965 रिश्ते नाते 
1965 मेरे सनम
1965 चांद और सूरज 
1965 बहू बेटी 
1965 आरजू
1965 टोक्यो में प्यार 
1966 प्रीत न जाने रीत
1966 मेरा साया 
1966 बदन करो 
1966 देवर 
1966 वो कोई और होगा
1967 चंदन का पालना
1967 अनीता 
1967 तीन बहुरानियाँ
1968 सुहाग 
1968 सरस्वतीचन्द्र
1968 पायल की झंकार वैदराज
1968 मेरा नाम जोहार 
1968 ब्रह्मचारी 
1968 आंखें 
1968 एक श्रीमान एक श्रीमती
1969 तुमसे अच्छा कौन है 
1969 सचाई
1969 प्यासी शाम 
1969 प्यार ही प्यार 
1969 प्रार्थना 
1969 बालक
1969 कब? क्यों? और कहाँ?
1970 तुम हसीं मैं जवान 
1970 समाज को बदल डालो 
1970 अलबेला 
1970 समाज को बदल डालो 
1970 अलबेला 
1971 जाने-अनजाने
1971 जाने-अनजाने
1971 -प्रीतम 
1971 हंगामा 
1971 वो दिन याद करो 
1971 नया ज़माना
1971 जवान मोहब्बत 
1971 हार जीत 
1972 दो गज ज़मीन के नीचे 
1972 चोर करो
1972 बाजीगर 
1972 जुगनू 
1973 बेनाम
1974 सन्यासी 
1975 आराम हराम आहे! 
1976 भंवर
1976 उधर का सिन्दूर
1976 कबीला 
1976 हा खेल सवल्यांचा 
1976 पलकों की छाँव में 
1977 साहेब बहादुर 
1977 नाव मोथा लक्षण खोटा
1977 सपनो की रानी
1977 चलता पुर्जा 
1978 देवता 
1978 कर्मयोगी
1978 Besharam बेशर्म
1978 अंजाम
1978 मान अपमान
1979 'खानदान' 
1979 जनता हवलदार
1979 गीत गाता चल 
1980 शीतला माता
1981 दासी 
1981 सन्नाटा 
1981 जेल यात्रा
1981 दिल ही दिल में 
1982 बड़े दिल वाला
1983 बिंदिया चमकेगी 
1984 माटी मांगे खून
1984 बिजली
1986 प्यार का मंदिर

मीना कुमारी (मृत्यु)

मीना कुमारी 🎂जन्म 01 अगस्त, 1932 ⚰️मृत्यु 31 मार्च, 1972 मीना कुमारी महजबीं बानो प्रसिद्ध नाम मीना कुमारी 🎂जन्म 01 अगस्त, 1932 जन्म भूमि म...