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Sunday, March 31, 2024
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Saturday, March 30, 2024
नागेश कुक्कुनूर
#30march
नागेश कुकुनूर
🎂30 मार्च 1967
हैदराबाद , आंध्र प्रदेश (वर्तमान तेलंगाना), भारत
जॉर्जिया तकनीकी संस्थान
वेयरहाउस एक्टर्स थिएटर
उस्मानिया विश्वविद्यालय
व्यवसाय
फ़िल्म निर्देशक, अभिनेता
2003 में, उन्होंने 3 दीवारें निर्देशित कीं, जिसे 2003 के भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भारतीय पैनोरमा अनुभाग में प्रदर्शित किया गया था । इस फिल्म का प्रीमियर कोलकाता फिल्म फेस्टिवल में भी किया गया था । लॉस एंजिल्स के भारतीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित होने के बाद , जहां इसे खूब सराहा गया, फिल्म को मैनचेस्टर में राष्ट्रमंडल महोत्सव में प्रदर्शित किया गया । भव्य प्रस्तुति में इसे शीर्ष पांच फिल्मों में से एक के रूप में नामांकित किया गया था। नागेश कुकुनूर को सर्वश्रेष्ठ कहानी के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिल चुका है ।
2006 में, इकबाल को निर्देशित करने के लिए उन्हें अन्य सामाजिक मुद्दों पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला । 2014 में, उन्हें लक्ष्मी के लिए पाम स्प्रिंग्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ कथा के लिए मर्सिडीज बेंज ऑडियंस अवार्ड मिला । 2015 में उन्होंने रोड मूवी , धनक का निर्देशन किया , जिसने सर्वश्रेष्ठ बच्चों की फिल्म के लिए क्रिस्टल बियर ग्रांड प्रिक्स जीता, और 65वें बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में जेनरेशन केप्लस के लिए चिल्ड्रन जूरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का विशेष उल्लेख जीता । फिल्म ने मुख्य श्रेणी-बच्चों की फीचर फिल्म प्रतियोगिता- सिनेमा इन स्नीकर्स (फिल्म फेस्टिवल) में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार और मॉन्ट्रियल इंटरनेशनल चिल्ड्रन्स फिल्म फेस्टिवल (एफआईएफईएम) में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार भी हासिल किया है।फिल्म ने 2016 के लिए सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता है ।
नागेश कुकुनूर का जन्म हैदराबाद में कुसुमा और सुदर्शन के घर हुआ था। कुकुनूर की मातृभाषा तेलुगु है ,और एक बच्चे के रूप में उन्हें अपने पड़ोस, नारायणगुडा के थिएटरों में तेलुगु, हिंदी और अंग्रेजी फिल्में देखना पसंद था । उन्होंने यरकौड के मोंटफोर्ट स्कूल से पढ़ाई की । नागेश कुकुनूर ने भारत के हैदराबाद में उस्मानिया विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। वह 1988 में संयुक्त राज्य अमेरिका के अटलांटा, जॉर्जिया चले गए और जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से पर्यावरण इंजीनियरिंग में अपनी मास्टर डिग्री पूरी की । जॉर्जिया टेक से स्नातक होने के बाद, वह टेक्सास में ट्रिनिटी कंसल्टेंट्स में पर्यावरण सलाहकार के रूप में काम करने गए, फिर अटलांटा में, इस दौरान उन्होंने फिल्म कार्यशालाओं में भाग लिया। उन्होंने अटलांटा में वेयरहाउस एक्टर थिएटर में अभिनय और निर्देशन का अध्ययन किया।
आनंद बक्षी
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🎂जन्म : 21 जुलाई 1930, रावलपिंडी, पाकिस्तान
⚰️मृत्यु: 30 मार्च 2002, मुम्बई
पत्नी: कमला मोहन
बच्चे: राकेश आनंद बख्शी, सुमन बख्शी दत्त, राजेश बख्शी
पोता या नाती: अदित्य दत्त
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आनंद बख्शी लोकप्रिय भारतीय कवि और फ़िल्मी गीतकार थे। ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के रावलपिंडी में इनका जन्म हुआ था। 1947 में बटवारे में परिवार लखनऊ आ बसा।
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उन्होंने रॉयल इंडियन नेवी में बतौर कैडेट काम किया था। लेकिन वह गायक बनने बम्बई पहुँचें। सबसे पहले उन्हें 1958 में भगवान दादा की फिल्म भला आदमी में गीत लिखने का मौका मिला। हालांकि उन्हें पहचान 1962 की मेहेंदी लगी मेरे हाथ से मिली।फिर 1965 की फिल्म जब जब फूल खिले के सभी गाने सुपरहिट रहे थे। उसी साल की फिल्म हिमालय की गोद में का गीत ‘चांद सी महबूबा हो मेरी’ उस समय बहुत पसंद किया गया था। 1967 की मिलन के गीत ‘सावन का महीना पवन करे शोर’ के बाद वह सफल गीतकार बन गए।
1969 की आराधना के गीत भी उन्होंने लिखें थे। इसका 'मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू' को गायक किशोर कुमार, अभिनेता राजेश खन्ना और संगीतकार आर॰ डी॰ बर्मन की सफलता में बहुत श्रेय दिया जाता है। आगे चलकर इन लोगों की जुगलबंदी में कई और सदाबहार गीत निर्मित हुए।इसके बाद वो 2002 में अपनी मृत्यु तक वो सक्रिय रूप से गीत लिखतें रहे। अपने 40 वर्षों से ऊपर के करियर में उन्होंने लगभग 600 फिल्मों के लिये 4 हजार से अधिक गीत लिखें। उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ गीतकार के लिये 40 बार नामांकित किया गया जिसमें वो 4 बार विजयी रहे।
वर्ष फिल्म संगीत निर्देशक
1964 मिस्टर एक्स इन बॉम्बे लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1964 यादें वसंत देसाई
1965 आधी रात के बाद चित्रगुप्त
1965 हिमालय की गोद में कल्याणजी-आनंदजी
1965 जब जब फूल खिले कल्याणजी-आनंदजी
1966 आसरा लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1966 आये दिन बहार के लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1966 देवर रोशन
1967 आमने सामने कल्याणजी-आनंदजी
1967 फर्ज़ लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1967 मिलन लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1969 अंजाना लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1969 आराधना एस॰ डी॰ बर्मन
1969 आया सावन झूम के लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1969 साजन लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1970 आन मिलो सजना लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1970 हमजोली लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1970 जीवन मृत्यु लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1970 कटी पतंग आर॰ डी॰ बर्मन
1970 खिलौना लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1971 अमर प्रेम आर॰ डी॰ बर्मन
1971 चाहत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1971 हाथी मेरे साथी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1971 मेरा गाँव मेरा देश लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1971 उपहार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1971 संजोग आर॰ डी॰ बर्मन
1972 अनोखी पहचान कल्याणजी-आनंदजी
1972 दुश्मन लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1972 अपना देश आर॰ डी॰ बर्मन
1972 गोरा और काला लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1972 सीता और गीता आर॰ डी॰ बर्मन
1973 अनुराग एस॰ डी॰ बर्मन
1973 बॉबी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1973 हीरा पन्ना आर॰ डी॰ बर्मन
1973 जैसे को तैसा आर॰ डी॰ बर्मन
1973 लोफर लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1974 आप की कसम आर॰ डी॰ बर्मन
1974 अजनबी आर॰ डी॰ बर्मन
1974 दोस्त लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1974 कसौटी एस॰ डी॰ बर्मन
1974 मजबूर लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
1974 मनोरंजन आर॰ डी॰ बर्मन
1975 चुपके चुपके एस॰ डी॰ बर्मन
#21july
देविका रानी
#30march
#09march
देविका रानी
🎂30 मार्च 1908, विशाखापट्टनम
⚰️09 मार्च 1994, बेंगलुरु
पति: स्वेतोस्लाव रॉरिक (विवा. 1945–1993), ज़्यादा
माता-पिता: लीला चौधरी, एम०एन० चौधरी
इनाम: दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म श्री
भारतीय रजतपट की पहली स्थापित नायिका जो अपने युग से कहीं आगे की सोच रखने वाली अभिनेत्री थीं और उन्होंने अपनी फ़िल्मों के माध्यम से जर्जर सामाजिक रूढ़ियों और मान्यताओं को चुनौती देते
हुए नए मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं को स्थापित करने का काम किया था। कवि शिरोमणि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर के ख़ानदान से ताल्लुक रखने
वाली देविका ने दस वर्ष के अपने फ़िल्मी कैरियर में कुल 15 फ़िल्मों में ही काम किया, लेकिन उनकी हर
फ़िल्म को क्लासिक का दर्जा हासिल है। विषय की गहराई और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी उनकी फ़िल्मों ने अंतरराष्ट्रीय और भारतीय फ़िल्म जगत में नए मूल्य और मानदंड स्थापित किए। हिंदी फ़िल्मों की
पहली स्वप्न सुंदरी और ड्रैगन लेडी जैसे विशेषणों से अलंकृत देविका को उनकी ख़ूबसूरती,शालीनता धाराप्रवाह अंग्रेज़ी और अभिनय कौशल के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जितनी लोकप्रियता और सराहना मिली उतनी कम ही अभिनेत्रियों को नसीब हो पाती है
देविका रानी का जन्म वाल्टेयर ( विशाखापटनम ) में हुआ था। वे विख्यात कवि श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर के वंश से सम्बंधित थीं, श्री टैगोर उनके चचेरे परदादा थे। देविका रानी के पिता कर्नल एम.एन. चौधरी मद्रास (अब चेन्नई ) के पहले 'सर्जन जनरल' थे। उनकी माता का नाम श्रीमती लीला चौधरी था। स्कूल की शिक्षा समाप्त करने के बाद 1920 के दशक के आरंभिक वर्षों में देविका रानी नाट्य शिक्षा ग्रहण करने के लिये लंदन चली गईं और वहाँ वे 'रॉयल एकेडमी आफ ड्रामेटिक आर्ट' (RADA) और रॉयल 'एकेडमी आफ म्युजिक' नामक संस्थाओं में भर्ती हो गईं। वहाँ उन्हें 'स्कालरशिप' भी प्रदान किया गया। उन्होंने 'आर्किटेक्चर','टेक्सटाइल' एवं 'डेकोर डिजाइन' विधाओं का भी अध्ययन किया और 'एलिजाबेथ आर्डन' में काम करने लगीं।
पढ़ाई पूरी करने के बाद देविका रानी ने निश्चय किया कि वह फ़िल्मों में अभिनय करेगी लेकिन परिवार वाले इस बात के सख्त ख़िलाफ़ थे क्योंकि उन दिनों संभ्रान्त परिवार की लड़कियों को फ़िल्मों में काम नहीं करने दिया जाता था। इंग्लैंड में कुछ वर्ष रहकर देविका रानी ने रॉयल अकादमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट में अभिनय की विधिवत पढ़ाई की। इस बीच उनकी मुलाकात सुप्रसिद्ध निर्माता हिमांशु राय से हुई। हिमांशु राय मैथ्यू अर्नाल्ड की कविता लाइट ऑफ एशिया के आधार पर इसी नाम से एक फ़िल्म बनाकर अपनी पहचान बना चुके थे। हिमांशु राय देविका रानी की सुंदरता पर मुग्ध हो गए और उन्होंने देविका रानी को अपनी फ़िल्म "कर्मा" में काम देने की पेशकश की जिसे देविका ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। यह वह समय था जब मूक फ़िल्मों के निर्माण का दौर समाप्त हो रहा था और रुपहले पर्दे पर कलाकार बोलते नजर आ रहे थे। हिमांशु राय ने जब वर्ष 1933 में फ़िल्म
कर्मा का निर्माण किया तो उन्होंने नायक की भूमिका स्वयं निभायी और अभिनेत्री के रूप में देविका रानी का चुनाव किया। फ़िल्म देविका रानी ने हिमांशु राय के साथ लगभग चार मिनट तक "लिप टू लिप" दृश्य देकर उस समय के समाज को अंचभित कर दिया। इसके लिए देविका रानी की काफ़ी आलोचना भी हुई और फ़िल्म को प्रतिबंधित भी किया गया। इसके बाद हिमांशु राय ने देविका रानी से शादी कर ली और मुंबई आ गए।
Thursday, March 28, 2024
ज़ोआ मोरानी
मीना कुमारी (मृत्यु)
मीना कुमारी 🎂जन्म 01 अगस्त, 1932 ⚰️मृत्यु 31 मार्च, 1972 मीना कुमारी महजबीं बानो प्रसिद्ध नाम मीना कुमारी 🎂जन्म 01 अगस्त, 1932 जन्म भूमि म...